बंटी का 'फ़िल्टर' वाला सत्य
एक छोटे शहर में बंटी नाम का एक लड़का रहता था। बंटी को अपने आप को बहुत 'कूल' दिखाने का शौक था, लेकिन असल में वह था थोड़ा सीधा-सादा। उसकी सबसे बड़ी कमजोरी थी सोशल मीडिया। वह अपनी असली जिंदगी से ज्यादा अपनी ऑनलाइन जिंदगी को शानदार बनाने में यकीन रखता था।
बंटी को पहाड़ों पर घूमने का बहुत शौक था, लेकिन उसकी जेब में इतने पैसे नहीं थे। एक दिन उसने ठान लिया कि वह अपनी प्रोफाइल पर ऐसी तस्वीरें डालेगा कि लोगों को लगे, वह किसी विदेशी जगह पर छुट्टियाँ मना रहा है।
सबसे पहले, वह अपने घर के पीछे वाले खाली प्लॉट में गया। वहाँ कुछ उबड़-खाबड़ पत्थर पड़े थे। बंटी ने एक पत्थर पर खड़े होकर अपना फोन निकाला और ज़ोर से हँसने लगा, जैसे कि वह किसी पहाड़ की चोटी पर खड़ा हो।
रात को उसने अपनी 'एडिटिंग लैब' (यानी अपने स्मार्टफोन) में घंटों काम किया। उसने फोटो के पीछे, प्लॉट के कचरे और बिजली के तार हटाए। उसने आसमान का रंग बदलकर 'माउंट एवरेस्ट के पास वाला नीला' कर दिया। फिर उसने एक 'पहाड़ी' फ़िल्टर लगाया और तस्वीर पोस्ट कर दी, कैप्शन में लिखा: "ब्रेथटेकिंग व्यू! दुनिया की छत पर... शांति!"
अगले ही दिन, बंटी की प्रोफाइल पर कमेंट्स की बाढ़ आ गई।
उसकी दूर की चाची ने कमेंट किया: "वाह बंटी, इतना खतरा! ध्यान से बेटा, गिर मत जाना।"
उसके दोस्त, चंटू ने पूछा: "भाई, कौन सी जगह है ये? ज़रा लोकेशन तो बता, मैं भी आता हूँ!"
बंटी को लगा कि उसका प्लान सफल हो गया।
लेकिन असली ड्रामा तब हुआ जब गाँव का सरपंच ज्ञानचंद (जो तकनीक के मामले में बहुत आगे था) ने वह फोटो देखी। ज्ञानचंद को बंटी पर शक हुआ, क्योंकि वह जानता था कि बंटी के घर के पास ऐसा कोई पहाड़ नहीं है।
ज्ञानचंद ने बंटी के घर के पीछे वाले प्लॉट को पहचान लिया, क्योंकि वहाँ उन्होंने पिछले साल एक पानी की टंकी बनवाने का वादा किया था (जो कभी नहीं बनी)।
ज्ञानचंद ने तुरंत बंटी की पोस्ट के नीचे कमेंट किया, वह भी अपनी लंबी-चौड़ी 'सरकारी' हिंदी में: "बंटी, तुम्हारी 'दुनिया की छत' बड़ी जानी-पहचानी लग रही है। क्या यह वही स्थान नहीं है जहाँ हमने पिछले वर्ष गाँव के अपशिष्ट प्रबंधन हेतु भूमि अधिग्रहण का प्रस्ताव रखा था? कृपया अपनी नवीनतम 'छुट्टियों' का पूरा पता हमें भी उपलब्ध कराएं, ताकि विकास कार्यों की प्रगति का अवलोकन किया जा सके।"
यह कमेंट देखकर सारे गाँव वाले हँसने लगे। बंटी को अपनी 'दुनिया की छत' (असली में कचरे का प्लॉट) पर इतनी शर्म आई कि उसने तुरंत वह तस्वीर डिलीट कर दी।
अगले दिन जब चंटू ने बंटी से पूछा कि वह अपनी छुट्टियों की लोकेशन क्यों नहीं बता रहा, तो बंटी ने धीरे से कहा: "वो... वो लोकेशन थोड़ी 'प्राइवेट' थी, यार। सिर्फ़ कैमरे के लिए बनी थी।"
और इस तरह बंटी ने समझा कि सोशल मीडिया पर 'फ़िल्टर' भले ही कितना भी ज़बरदस्त हो, लेकिन असलियत छुपती नहीं है।
सीख: अपनी जिंदगी को दिखाने के लिए फ़िल्टर का इस्तेमाल मत करो, बल्कि उसे जीने के लिए करो।
Comments
Post a Comment