चतुर भिखारी और उसका स्मार्टफोन

 

​एक शहर में लक्खू बाबा नाम का एक भिखारी था। वह हमेशा पुराने और फटे कपड़ों में रहता था, लेकिन उसके पास एक ऐसा राज़ था जिसे कोई नहीं जानता था। लक्खू बाबा भीख माँगने के बाद, अक्सर एक सुनसान जगह पर जाता और अपनी झोली से एक चमकता हुआ स्मार्टफोन निकालता!

​लक्खू बाबा घंटों उस फोन पर रील्स देखता, ऑनलाइन गेम्स खेलता और कभी-कभी तो क्रिप्टो करेंसी के भाव भी चेक करता। उसने अपना सारा पैसा एक बैंक अकाउंट में जमा किया हुआ था, जिसे उसने एक फर्जी नाम से खुलवाया था।

​एक दिन, शहर के मेयर श्रीमान ठेंगाप्रसाद अपने काफिले के साथ उस रास्ते से गुजर रहे थे, जहाँ लक्खू बाबा भीख माँग रहा था। श्रीमान ठेंगाप्रसाद गरीबों के प्रति अपनी नकली सहानुभूति दिखाने के लिए जाने जाते थे।

​मेयर ने अपना काफिला रुकवाया और लक्खू बाबा के पास गए। उन्होंने कैमरे के सामने एक भाषण देना शुरू किया: "देखो दोस्तों, हमारे शहर में कितने गरीब लोग हैं। हमें इनकी मदद करनी चाहिए। बाबा, आपको कोई दिक्कत तो नहीं?"

​लक्खू बाबा ने तुरंत अपनी घिसी-पिटी झोली और फटे कपड़े ठीक किए और आँखों में आंसू लाकर बोला: "हुजूर, बहुत गरीबी है। दो वक्त की रोटी भी नसीब नहीं होती। भगवान आपका भला करे!"

​मेयर ने मुस्कुराते हुए सौ रुपये का नोट उसकी झोली में डाला और कैमरामैन को फोटो लेने को कहा। लक्खू बाबा ने हाथ जोड़कर धन्यवाद दिया और मेयर वहाँ से चले गए।

​जैसे ही मेयर का काफिला आँखों से ओझल हुआ, लक्खू बाबा ने अपनी झोली से फोन निकाला और मुस्कुराते हुए सौ रुपये के नोट की फोटो खींची। उसने तुरंत अपने ऑनलाइन बैंक अकाउंट में उस सौ रुपये को स्कैन करके जमा कर दिया।

​पास में ही बैठा एक दूसरा भिखारी, जिसका नाम मुन्ना था, यह सब देख रहा था। मुन्ना ने अपनी आँखें मलते हुए कहा: "बाबा, ये क्या? तुम्हारे पास तो स्मार्टफोन है?"

​लक्खू बाबा ने मुस्कुराते हुए फोन को वापस झोली में रखा और बोला: "अरे मुन्ना, ये तो सिर्फ दिखावा है। असली खेल तो अकल का है। अगर तुम गरीब दिखोगे, तो लोग तुम्हें पैसे देंगे, लेकिन अगर तुम फोन चलाओगे, तो कोई नहीं देगा! ये मेरा 'स्मार्ट' तरीका है भीख माँगने का।"

​मुन्ना ने सिर खुजलाया और सोचा, "काश मेरे पास भी ऐसी 'अकल' होती।"

​अगले दिन से मुन्ना भी, लक्खू बाबा की देखा-देखी, अपनी झोली में एक पुराना टूटे हुए स्क्रीन वाला फोन रखने लगा, ताकि वह भी 'स्मार्ट' भिखारी बन सके। लेकिन उसे नहीं पता था कि लक्खू बाबा के पास सिर्फ स्मार्टफोन नहीं, बल्कि स्मार्ट बैंक अकाउंट भी था!

सीख: कभी-कभी जो जैसा दिखता है, वैसा होता नहीं है! और गरीबी भी 'स्मार्ट' हो सकती है।

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