पेड़ जो बोलता था
एक गाँव में सड़क के किनारे एक बहुत पुराना बरगद का पेड़ था।
गाँव के बच्चे उसके नीचे खेलते, बुज़ुर्ग वहीं बैठकर बातें करते, और राहगीर उसकी छाँव में आराम करते।
समय बीता…
गाँव शहर में बदल गया।
अब वहाँ सड़क चौड़ी करनी थी, तो लोगों ने कहा —
“इस पेड़ को काट दो, रास्ता बनाना है।”
जब लकड़हारे आए, तो अचानक पेड़ से एक धीमी सी आवाज़ आई —
“मैंने तुम्हें हमेशा छाँव दी, हवा दी, ऑक्सीजन दी… और अब तुम मुझे ही काटने चले हो?”
लकड़हारे रुक गए।
पास खड़ा एक छोटा बच्चा बोला,
“अगर हम इसे काट देंगे, तो गर्मी कौन रोकेगा? हवा कौन देगा?”
यह सुनकर सबका दिल पिघल गया।
पेड़ को काटने का आदेश रद्द कर दिया गया और वहाँ के लोगों ने उसके चारों ओर एक लोहे की रेलिंग लगाकर उसे ‘गाँव का रक्षक’ नाम दे दिया।
🌟 सीख (Moral):
प्रकृति हमारी माँ है। जब हम उसकी रक्षा करते हैं, वह हमें जीवन देती है।
कभी भी पेड़ या धरती को नुकसान न पहुँचाओ — वही हमारे असली रक्षक हैं।
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