एक दीपक की सीख


 एक गाँव में एक बहुत ही बुद्धिमान बुज़ुर्ग रहते थे।

एक दिन उन्होंने गाँव के बच्चों और बड़ों को बुलाया और एक कमरे में बीस दीपक जलाकर रख दिए।

उन्होंने कहा —
“अब सब लोग अंदर जाकर एक-एक दीपक बुझा दो, लेकिन बिना किसी को बताए।”

सभी अंदर गए।
कई लोगों ने जल्दी से दीपक बुझा दिए और बाहर आ गए।
लेकिन एक छोटा लड़का अकेला अंदर बहुत देर तक खड़ा रहा।

जब वह बाहर आया, तो उसके दीपक अब भी जल रहे थे।
बुज़ुर्ग ने पूछा, “बेटा, तुमने दीपक क्यों नहीं बुझाया?”

लड़के ने शांत स्वर में कहा,
“आपने कहा था किसी को बताए बिना बुझाना। लेकिन जब मैं अकेला था, तो मुझे खुद के भीतर की रोशनी देख रही थी। वह कह रही थी कि यह गलत है।”

बुज़ुर्ग मुस्कुराए और बोले,
“जिस दिन इंसान अपने भीतर के दीपक को सुनना सीख लेता है,
उसी दिन वह अंधेरे में भी सही रास्ता ढूँढ लेता है।”


🌟 सीख (Moral):

असली ईमानदारी वह होती है जो हम अकेले में भी निभाते हैं।
हर इंसान के भीतर एक दीपक होता है — उसे जलाए रखना ही सच्चा जीवन है।

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