अमावस्या की झील
राजेश एक फोटोग्राफर था, जिसे प्रकृति और रहस्यमयी जगहों की तस्वीरें लेना बहुत पसंद था। एक बार, उसे एक पुरानी लोककथा के बारे में पता चला, जिसमें एक रहस्यमयी झील का जिक्र था। कहानी के अनुसार, वह झील सिर्फ अमावस्या की रात को पूरी तरह से दिखाई देती थी और उस रात, जो कोई भी झील में झांकता था, उसे अपना सबसे गहरा डर दिखाई देता था। राजेश ने इसे एक बेहतरीन फोटो अवसर समझा और उस झील की तलाश में निकल पड़ा।
कई दिनों की खोज के बाद, उसे घने जंगल के बीच वह झील मिली। यह अमावस्या की रात थी और चारों ओर गहरा सन्नाटा पसरा हुआ था। झील का पानी इतना काला था कि उसमें आसमान के तारे भी नहीं चमक रहे थे। राजेश ने अपना कैमरा तैयार किया और झील के किनारे बैठ गया।
उसने पहली तस्वीर ली। फ्लैश चमका और एक पल के लिए झील का पूरा नजारा रोशन हो गया। लेकिन जब उसने कैमरे की स्क्रीन पर तस्वीर देखी, तो वह हैरान रह गया। तस्वीर में झील के पानी में उसका अपना चेहरा नहीं, बल्कि एक भयानक आकृति दिख रही थी - एक बूढ़ी, झुर्रियों वाली औरत का चेहरा, जिसकी आँखें काली और खाली थीं, जैसे वह सीधे उसकी आत्मा में झांक रही हो।
राजेश को लगा कि यह सिर्फ कैमरे का कोई ग्लिच है। उसने एक और तस्वीर ली। इस बार, तस्वीर में एक लंबा, काला साया दिखा, जो उसके पीछे खड़ा था, उसकी गर्दन पर हाथ बढ़ा रहा था। साया इतना वास्तविक लग रहा था कि राजेश को अपनी गर्दन पर एक ठंडी उंगली का अहसास हुआ। वह डर के मारे कांपने लगा।
उसने जल्दी से कैमरे को बंद किया और झील के पानी में झाँका। इस बार, उसे अपना चेहरा साफ दिखाई दिया, लेकिन उसकी आँखों में एक अजीब सा डर था। तभी, झील के पानी से एक फुसफुसाहट सुनाई दी, "तुम अपना डर देख चुके हो... अब तुम हमेशा इसे साथ रखोगे।"
राजेश ने पीछे मुड़कर देखा, लेकिन वहाँ कोई नहीं था। उसे लगा जैसे जंगल की हर पत्ती, हर टहनी उसे घूर रही है। वह वहाँ से भागने लगा। जंगल का रास्ता उसे और भी डरावना लगने लगा। पेड़ों की परछाइयाँ किसी राक्षस की तरह दिख रही थीं। उसे हर तरफ उस बूढ़ी औरत का चेहरा और वह काला साया दिखाई दे रहा था।
जब वह सुबह गाँव पहुँचा, तो उसका चेहरा पीला पड़ चुका था और उसकी आँखें लाल थीं, जैसे उसने पूरी रात जागकर बिताई हो। वह कभी भी उस झील के पास वापस नहीं गया। लेकिन, आज भी, हर अमावस्या की रात को, राजेश को अपनी नींद में उस बूढ़ी औरत का चेहरा और काला साया दिखाई देता है, और वह फुसफुसाहट उसे डराती रहती है, "तुम अपना डर देख चुके हो... अब तुम हमेशा इसे साथ रखोगे।"
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