​शापित गुड़िया का घर

 


​रीना को पुरानी चीज़ें इकट्ठा करने का बहुत शौक था। एक दिन, एक पुराने एंटीक स्टोर में उसे एक सुंदर, पर थोड़ी डरावनी दिखने वाली चीनी मिट्टी की गुड़िया मिली। गुड़िया की आँखें नीली थीं और उसके होंठ पतले थे, जो एक अजीब सी मुस्कान बिखेर रहे थे। दुकानदार ने रीना को चेतावनी दी, "यह गुड़िया शापित है, इसे मत खरीदो।" लेकिन रीना ने उसकी बात अनसुनी कर दी और गुड़िया को अपने साथ ले आई।

​रीना ने गुड़िया को अपने बेडरूम की शेल्फ पर सजा दिया। पहले कुछ दिन तो सब ठीक रहा, लेकिन धीरे-धीरे अजीब घटनाएँ घटने लगीं। रात में, रीना को अक्सर अपने कमरे से हल्की फुसफुसाहट की आवाज़ें सुनाई देती थीं। उसे लगता था जैसे कोई उसका नाम पुकार रहा हो।

​एक रात, रीना सो रही थी, तभी उसे अपने बिस्तर के पास किसी के चलने की आवाज़ आई। उसने आँखें खोलीं और देखा कि वही गुड़िया, जो शेल्फ पर रखी थी, अब उसके बिस्तर के पास फर्श पर खड़ी थी और उसकी तरफ देख रही थी। रीना के रोंगटे खड़े हो गए। उसने सोचा कि शायद उसने सपने में देखा होगा। उसने हिम्मत करके गुड़िया को उठाया और वापस शेल्फ पर रख दिया।

​अगली सुबह, जब रीना उठी, तो उसने देखा कि गुड़िया फिर से फर्श पर पड़ी थी। इस बार, उसकी नीली आँखें सीधे रीना की तरफ घूर रही थीं। रीना को अब यकीन हो गया कि कुछ गड़बड़ है। उसने अपनी सहेली प्रिया को बुलाया और उसे सब कुछ बताया। प्रिया ने सलाह दी कि वह उस गुड़िया को फेंक दे।

​लेकिन रीड़िया को गुड़िया से एक अजीब सा जुड़ाव महसूस हो रहा था, जैसे गुड़िया उसे जाने नहीं देना चाहती थी। उसी शाम, जब रीना रसोई में खाना बना रही थी, तो उसे अपने कमरे से कुछ गिरने की आवाज़ आई। वह डरते हुए कमरे में गई और देखा कि शेल्फ पर रखी सारी किताबें नीचे गिरी हुई थीं और गुड़िया बिस्तर पर बैठी हुई थी, उसके होंठों पर अब एक चौड़ी, दुष्ट मुस्कान थी।

​रीना डर के मारे चीख पड़ी। वह पीछे मुड़ी और भागने की कोशिश की, लेकिन तभी उसे लगा जैसे किसी अदृश्य शक्ति ने उसके पैर पकड़ लिए हों। वह गिर पड़ी। गुड़िया धीरे-धीरे बिस्तर से नीचे उतरी और रीना की ओर बढ़ने लगी। गुड़िया के चलने की आवाज़ एक छोटी बच्ची के कदमों जैसी थी, लेकिन हर कदम के साथ, उस आवाज़ में एक भयानक भारीपन आता जा रहा था।

​गुड़िया रीना के पास आकर रुक गई। उसकी नीली आँखें चमक रही थीं और उसके होंठों पर वह भयानक मुस्कान अब और भी बड़ी हो चुकी थी। तभी, गुड़िया का सिर धीरे-धीरे एक तरफ झुका और उसने एक धीमी, पर बेहद डरावनी आवाज़ में कहा, "तुम मुझे फेंक नहीं सकती... अब तुम मेरी हो।"

​रीना ने अगली सुबह खुद को अस्पताल में पाया। वह सदमे में थी और कुछ बोल नहीं पा रही थी। जब उसके घर की तलाशी ली गई, तो वह गुड़िया कहीं नहीं मिली। लेकिन रीना को आज भी वह नीली आँखें और वह भयानक मुस्कान अपने सपनों में दिखाई देती है, और वह फुसफुसाहट उसे कभी चैन से सोने नहीं देती, "अब तुम मेरी हो।"

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