दीपावली की कथा
दीपावली का त्योहार सिर्फ एक दिन का नहीं, बल्कि पाँच दिनों का पर्व होता है, और इसे मनाने के पीछे कई पौराणिक कथाएँ और ऐतिहासिक कारण हैं।
यहाँ दीपावली से जुड़ी तीन सबसे मुख्य और प्रचलित कथाएँ विस्तार से दी गई हैं:
1. भगवान राम का चौदह वर्ष का वनवास समाप्त कर अयोध्या लौटना (विजय और प्रकाश का पर्व)
दिवाली मनाए जाने का यह सबसे प्रचलित और प्रसिद्ध कारण है:
* त्रेता युग की बात है, जब अयोध्या के राजा दशरथ के पुत्र भगवान श्री राम को उनकी विमाता कैकेयी के कहने पर 14 वर्ष का वनवास जाना पड़ा था। उनके साथ उनकी पत्नी सीता और भाई लक्ष्मण भी वन गए थे।
* वनवास के दौरान, लंका के राक्षस राजा रावण ने छल से माता सीता का हरण कर लिया।
* भगवान राम ने हनुमान जी और सुग्रीव की वानर सेना की सहायता से लंका पर चढ़ाई की और भीषण युद्ध के बाद दशहरे के दिन रावण का वध किया, और सत्य की असत्य पर विजय स्थापित की।
* रावण को पराजित करने के बाद, भगवान राम, माता सीता और लक्ष्मण के साथ, कार्तिक मास की अमावस्या के दिन 14 वर्ष का वनवास पूर्ण करके अपनी नगरी अयोध्या लौटे।
* अपने प्रिय राजा और रानी के इतने लंबे समय बाद आगमन से अयोध्यावासियों का हृदय हर्ष से भर गया। पूरी अयोध्या में खुशी की लहर दौड़ गई।
* अमावस्या की वह रात घोर अंधकार वाली थी, लेकिन अयोध्या के नागरिकों ने अपने राजा के स्वागत में पूरे नगर को घी के छोटे-छोटे दीयों (मिट्टी के दीपकों) से सजा दिया। हर गली, हर घर और हर कोने में दीपक जलाए गए।
* दीयों की रोशनी से पूरी अयोध्या जगमगा उठी, और यह अँधेरी रात प्रकाश से भर गई।
* यह दिन बुराई पर अच्छाई, अंधकार पर प्रकाश और असत्य पर सत्य की विजय का प्रतीक बन गया।
* तभी से, इस महापर्व को प्रति वर्ष दीपावली (दीप+आवली अर्थात् दीयों की पंक्ति) के रूप में मनाया जाने लगा।
2. देवी लक्ष्मी का समुद्र मंथन से प्रकट होना (धन और समृद्धि का पर्व)
दिवाली पर लक्ष्मी पूजा के पीछे यह पौराणिक कथा है:
* एक बार देवताओं ने दैत्यों के अत्याचारों से मुक्ति पाने के लिए क्षीरसागर (दूध का समुद्र) का मंथन किया था। इस मंथन में भगवान विष्णु ने कच्छप (कछुए) का रूप धारण कर सहायता की थी।
* समुद्र मंथन के दौरान, विभिन्न प्रकार के रत्न और वस्तुएँ निकलीं।
* कार्तिक मास की अमावस्या के दिन, इसी मंथन से धन, ऐश्वर्य और समृद्धि की देवी, माता लक्ष्मी प्रकट हुईं। वे कमल के आसन पर विराजमान थीं।
* माता लक्ष्मी के प्रकट होने से सभी देवताओं और संसार में खुशी छा गई।
* चूँकि माता लक्ष्मी धन और वैभव की देवी हैं, इसलिए उनके प्राकट्य के इस दिन को दीपावली के रूप में मनाया जाता है।
* इस दिन माता लक्ष्मी के साथ विघ्नहर्ता भगवान गणेश की भी पूजा की जाती है, ताकि घर में धन के साथ-साथ बुद्धि और शुभता का भी वास हो।
3. नरकासुर का वध और 16,000 कन्याओं की मुक्ति
दीपावली के एक दिन पहले नरक चतुर्दशी (छोटी दिवाली) पर यह कथा मनाई जाती है:
* प्राचीन काल में नरकासुर नामक एक अत्यंत क्रूर और शक्तिशाली राक्षस था, जिसने अपनी शक्ति के बल पर तीनों लोकों में हाहाकार मचा रखा था।
* उसने 16,100 राजकुमारियों और महिलाओं को बंदी बनाकर अपने यहाँ कैद कर लिया था।
* राक्षस के अत्याचारों से दुखी होकर, देवताओं और ऋषियों ने भगवान श्रीकृष्ण से नरकासुर के आतंक को समाप्त करने की प्रार्थना की।
* भगवान कृष्ण ने अपनी पत्नी सत्यभामा के साथ नरकासुर पर आक्रमण किया और उसे युद्ध में पराजित कर उसका वध कर दिया।
* नरकासुर का वध कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को हुआ था।
* नरकासुर का वध करने के बाद, भगवान कृष्ण ने बंदी बनाई गई 16,100 कन्याओं को उसकी कैद से मुक्त कराया।
* इन कन्याओं को समाज में सम्मान दिलाने के लिए, भगवान कृष्ण ने उन सभी को अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार किया।
* इस विजय और कन्याओं की मुक्ति की खुशी में, अगले दिन अमावस्या को दीप जलाकर उत्सव मनाया गया, जिसे छोटी दिवाली और फिर मुख्य दीपावली के रूप में मनाया जाता है।
इन सभी कथाओं का मूल संदेश एक ही है: बुराई पर अच्छाई की, अंधकार पर प्रकाश की और अन्याय पर न्याय की विजय। दीपावली का पर्व इन्हीं विजयों का उत्सव है।
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