मोबाइल और मनीष की गलती



  मनीष एक होशियार लेकिन थोड़ा लापरवाह बच्चा था।

वह हर समय अपने मोबाइल फोन में गेम खेलता रहता था — स्कूल में, घर में, यहाँ तक कि खाने के वक्त भी।

एक दिन उसकी टीचर ने कहा,
“मनीष, कल स्कूल में ‘ईमानदारी प्रतियोगिता’ है, और जो जीतेगा उसे पुरस्कार मिलेगा।”

मनीष खुश हुआ, लेकिन उसने फिर भी सारा दिन गेम खेला और कुछ तैयारी नहीं की।
अगले दिन, जब प्रतियोगिता शुरू हुई, तो एक सवाल आया —
“अगर तुम्हें सड़क पर कोई बटुआ मिले जिसमें पैसे हों, तो तुम क्या करोगे?”

बाकी बच्चे सोच में थे, लेकिन मनीष बोला,
“मैं तो रख लूँगा!”
पूरी कक्षा हँस पड़ी, और टीचर ने प्यार से कहा,
“बेटा, अगर तुम मोबाइल में कम और ज़िंदगी में ज़्यादा देखोगे, तो समझोगे कि ईमानदारी से मिला सम्मान पैसे से बड़ा होता है।

उस दिन मनीष ने फैसला किया कि अब वह मोबाइल में कम और असली ज़िंदगी में ज़्यादा ध्यान देगा।
धीरे-धीरे उसने अपनी गलती सुधारी और एक दिन ईमानदारी पुरस्कार जीत लिया।


🌟 सीख (Moral):

मोबाइल हमारे काम का साधन है, जीवन का मालिक नहीं। ईमानदारी और समझदारी सबसे बड़ी जीत है।

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