दिपावली का त्यौहार
दिवाली पर लक्ष्मी-गणेश की पूजा का विशेष महत्व है, और यह पूजा मुख्य रूप से प्रदोष काल (शाम का समय, सूर्यास्त के बाद) में की जाती है। पूजा की विधि विस्तार से निम्नलिखित है:
I. पूजा की तैयारी और सामग्री
1. आवश्यक सामग्री (मुख्य रूप से):
* मूर्ति: श्री गणेश, माता लक्ष्मी और कुबेर जी की नई मूर्तियाँ या तस्वीरें।
* चौकी/आसन: पूजा के लिए एक छोटी चौकी या पाटा, जिस पर लाल या पीला वस्त्र बिछा हो।
* दीपक: घी के दीपक (एक अखंड ज्योत के लिए), तेल के छोटे दीये (पूरे घर में जलाने के लिए)।
* कलश: एक जल से भरा कलश (वरुण देव के आह्वान के लिए)।
* प्रसाद: खील, बताशे, मिठाई, फल (केला, सेव, सीताफल), गन्ना, सिंघाड़ा आदि।
* पुष्प: कमल का फूल (अत्यधिक शुभ), गुलाब, गेंदा और फूलों की माला।
* पत्ते: पान के पत्ते, आम के पत्ते।
* अन्य: सुपारी, लौंग, इलायची, हल्दी, कुमकुम (रोली), अक्षत (चावल), गंगाजल, कपूर, धूप/अगरबत्ती, पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, गंगाजल)।
* धन संबंधी: नए या पुराने सिक्के, नोट, आभूषण, बहीखाते (व्यापार के खाते), तिजोरी की चाबी।
2. पूजा स्थल की तैयारी:
* सफाई: पूजा स्थल (घर का ईशान कोण या उत्तर-पूर्व दिशा) को अच्छी तरह साफ करें और गंगाजल छिड़ककर पवित्र करें।
* रंगोली: प्रवेश द्वार और पूजा स्थल पर रंगोली और अल्पना बनाएँ।
* चौकी स्थापना: एक चौकी पर लाल या गुलाबी वस्त्र बिछाएँ।
* मूर्ति स्थापना:
* सबसे पहले चावल का ढेर (अष्टदल या स्वास्तिक के रूप में) बनाकर उस पर गणेश जी (दाईं ओर) और माता लक्ष्मी (बाईं ओर) की प्रतिमा स्थापित करें।
* कलश (वरुण देव का प्रतीक) को चावल के ढेर पर स्थापित करें और उसके मुख पर आम के पत्ते लगाकर नारियल रखें।
* कुबेर जी, माता सरस्वती (खातों की पूजा के लिए) और अन्य देवी-देवताओं की प्रतिमाएँ भी स्थापित करें।
II. पूजा की सरल और विस्तृत विधि
पूजा का आरंभ शुद्ध मन और भक्तिभाव से करना चाहिए।
1. पवित्रीकरण और संकल्प
* पवित्रीकरण: 'ॐ अपवित्रः पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोऽपि वा। यः स्मरेत्पुण्डरीकाक्षं स बाह्याभ्यन्तरः शुचिः॥' मंत्र का जाप करते हुए स्वयं पर और पूजा सामग्री पर जल छिड़कें।
* दीप प्रज्वलन: सबसे पहले घी का दीपक जलाएँ और 'शुभं करोति कल्याणम्...' मंत्र बोलकर उसे प्रणाम करें।
* संकल्प: हाथ में जल, चावल और फूल लेकर अपनी मनोकामना (धन, स्वास्थ्य, सुख-समृद्धि की प्राप्ति) बोलते हुए पूजा का संकल्प लें और जल को भूमि पर छोड़ दें।
2. गणेश जी का पूजन (सबसे पहले)
* सबसे पहले प्रथम पूज्य श्री गणेश का आवाहन करें।
* उन्हें जल अर्पित करें, पंचामृत से स्नान कराएँ और फिर शुद्ध जल से स्नान कराएँ।
* रोली (कुमकुम), अक्षत (चावल) और पुष्प चढ़ाएँ।
* दूर्वा (घास) और मोदक (लड्डू) अर्पित करें।
3. लक्ष्मी जी का पूजन (षोडशोपचार)
* आवाहन एवं आसन: माता लक्ष्मी का ध्यान करते हुए उन्हें आसन ग्रहण करने का आवाहन करें।
* स्नान: सबसे पहले शुद्ध जल, फिर पंचामृत और पुनः शुद्ध जल से स्नान कराएँ।
* वस्त्र/आभूषण: माता को नए वस्त्र, आभूषण (यदि हों) या मौली (कलावा) और इत्र चढ़ाएँ।
* अलंकार: रोली (कुमकुम), अक्षत, हल्दी, सिन्दूर और पुष्प (विशेषकर कमल) चढ़ाएँ।
* धूप-दीप: धूप और दीपक जलाएँ।
* प्रसाद/भोग: खील, बताशे, मिठाई, फल और नैवेद्य अर्पित करें।
4. बही-खाते और धन की पूजा
* गणेश और लक्ष्मी जी की पूजा के बाद, अपने व्यापार के बही-खाते, कलम, पैसे, सिक्के और तिजोरी की चाबी को चौकी पर रखकर उन्हें तिलक लगाएँ।
* इन पर अक्षत, पुष्प और कुमकुम चढ़ाएँ। यह धन और आय के स्रोतों की पूजा है।
5. श्री सूक्त का पाठ और मंत्र जाप
* पूजा के दौरान और बाद में श्री सूक्त का पाठ करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
* महा लक्ष्मी मंत्र: 'ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्म्यै नमः' मंत्र का जाप करें।
* कुबेर मंत्र: 'ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्याधिपतये, धनधान्यसमृद्धिं में देहि दापय स्वाहा।' मंत्र का जाप करें।
6. आरती और क्षमा प्रार्थना
* पूजा के अंत में घी के दीपक से गणेश जी और माता लक्ष्मी की आरती करें।
* परिवार के सभी सदस्य मिलकर श्रद्धापूर्वक आरती गाएँ।
* पूजा में हुई किसी भी भूल-चूक के लिए हाथ जोड़कर क्षमा प्रार्थना करें।
III. विशेष बातें
* पहला दीपक: घर का पहला दीपक जल के कलश के पास रखें।
* अखंड दीपक: पूजा स्थल पर रात भर जलने वाला एक अखंड दीपक जलाना शुभ होता है।
* यम दीपक: धनतेरस की तरह ही, दीपावली की शाम को भी घर के बाहर दक्षिण दिशा में एक चारमुखी दीपक जलाना चाहिए, जिसे यम दीपक कहते हैं। यह अकाल मृत्यु से रक्षा के लिए होता है।
* दीप माला: पूजा के बाद पूरे घर में, विशेषकर दरवाज़ों, खिड़कियों और आँगन में दीये जलाएँ।
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