लोमड़ी और अंगूर
एक बार की बात है। एक घने जंगल में एक भूखी लोमड़ी घूम रही थी। उसे बहुत ज़ोरों की भूख लगी थी, पर पूरे जंगल में उसे खाने के लिए कुछ भी नहीं मिल रहा था।
थोड़ी देर बाद उसे एक अंगूरों की बेल दिखाई दी, जिस पर हरे-हरे, रसीले अंगूर लटक रहे थे। अंगूरों को देखकर लोमड़ी के मुँह में पानी आ गया। उसने सोचा —
> “वाह! ये तो बहुत स्वादिष्ट लग रहे हैं। अगर मैं इन्हें खा लूँ तो मेरी भूख मिट जाएगी।”
लोमड़ी ने उछलकर अंगूर तोड़ने की कोशिश की, लेकिन अंगूर बहुत ऊँचाई पर थे। उसने कई बार ज़ोर लगाकर कूद मारी, पर हर बार वह नीचे गिर जाती।
काफी देर तक कोशिश करने के बाद लोमड़ी थक गई। वह बोली —
> “ये अंगूर तो खट्टे होंगे, मैं इन्हें क्यों खाऊँ?”
ऐसा कहकर वह वहाँ से चली गई।
---
🪶 सीख (Moral):
> जो चीज़ हमारी पहुँच से बाहर होती है, हम अक्सर उसे बुरा कहकर खुद को दिलासा देते हैं।
“असफलता को स्वीकार करना बेहतर है, बजाय बहाने बनाने के।”
The Fox and the Grapes
Comments
Post a Comment