गजेंद्र मोक्ष: एक हाथी और भगवान विष्णु की कथा


 बहुत समय पहले, त्रिकूट पर्वत पर एक विशाल और घना जंगल था, जहाँ अनेक प्रकार के जीव-जंतु निवास करते थे। इस जंगल में एक अत्यंत शक्तिशाली और बलशाली हाथी, जिसका नाम गजेंद्र था, अपने झुंड के साथ रहता था। गजेंद्र अपने झुंड का राजा था और सभी उसका सम्मान करते थे।

​एक गर्म दिन, गजेंद्र अपने झुंड के साथ जंगल में एक सुंदर कमल-तालाब के पास पहुँचा। पानी में खेलने और गर्मी से राहत पाने के लिए, गजेंद्र तालाब में उतरा। वह आनंद से अपने परिवार के साथ जल-क्रीड़ा कर रहा था।

​अचानक, तालाब के गहरे पानी से एक शक्तिशाली मगरमच्छ (जिसे ग्राह भी कहा जाता है) निकला और उसने गजेंद्र का पैर पकड़ लिया। मगरमच्छ बहुत बलवान था और उसने गजेंद्र को पानी में खींचना शुरू कर दिया। गजेंद्र भी कम शक्तिशाली नहीं था; उसने अपनी पूरी ताकत लगाकर मगरमच्छ से अपनी जान छुड़ाने की कोशिश की।

​यह लड़ाई कई दिनों तक चली। गजेंद्र ने अपनी जान बचाने के लिए हर संभव प्रयास किया, लेकिन मगरमच्छ की पकड़ ढीली नहीं पड़ी। धीरे-धीरे गजेंद्र की शक्ति कम होने लगी। उसके साथी हाथी और उसका झुंड उसकी मदद करने की कोशिश करते रहे, लेकिन मगरमच्छ इतना भयानक था कि वे कुछ भी नहीं कर पा रहे थे।

​जब गजेंद्र को लगा कि उसकी मृत्यु निकट है और कोई भी उसे नहीं बचा सकता, तब उसे अपने पिछले जन्मों की स्मृति हुई और उसने अपनी आखिरी शक्ति बटोरकर भगवान विष्णु को पुकारा। उसने अपनी सूँड में एक कमल का फूल उठाया और उसे भगवान को अर्पित करते हुए, अत्यंत करुणा से कहा, "हे नारायण, हे जगदीश्वर, मुझे इस संकट से बचाओ! तुम ही मेरे एकमात्र रक्षक हो!"

​जैसे ही गजेंद्र ने सच्चे हृदय से भगवान का नाम लिया, वैकुंठ में भगवान विष्णु को गजेंद्र की पुकार सुनाई दी। भगवान विष्णु ने एक क्षण भी देर नहीं की। उन्होंने अपना गरुड़ बुलाया और बिना किसी शस्त्र के, तीव्र गति से त्रिकूट पर्वत की ओर उड़ चले।

​पलक झपकते ही भगवान विष्णु वहाँ प्रकट हुए। उन्होंने देखा कि गजेंद्र पीड़ा में था और मगरमच्छ उसे मृत्यु की ओर खींच रहा था। भगवान ने अपने सुदर्शन चक्र का आवाहन किया और एक ही झटके में मगरमच्छ का वध कर दिया, जिससे गजेंद्र मुक्त हो गया।

​गजेंद्र, जो अब अपनी जान बच जाने से कृतज्ञ था, ने भगवान के चरणों में अपना सिर झुका दिया। भगवान विष्णु ने गजेंद्र को न केवल बचाया, बल्कि उसे मोक्ष भी प्रदान किया। इस घटना को गजेंद्र मोक्ष के नाम से जाना जाता है और यह दर्शाता है कि भगवान अपने भक्तों की पुकार सुनकर तत्काल सहायता करते हैं, चाहे वे किसी भी रूप में क्यों न हों। यह कथा शरणागति (भगवान के प्रति पूर्ण समर्पण) के महत्व को दर्शाती है।


(Gajendra Moksha: Ek Haathi Aur Bhagwan Vishnu Ki Katha)

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